प्रकृति ने मनुष्यों को बहुत कुछ दिया जैसे घने वन सुन्दर झरने अनेकों जड़ी बूटियां आदि । लेकिन मनुष्य अपने लालची स्वभाव वश उसका दुरुपयोग करता रहा है और
जब जब प्रकृति मनुष्य से नाराज हुई है तब तब वह मानुष जाति का विनाश करती रही है।
जब मनुष्य संसाधनों का अत्यधिक दोहन करने लगता है तभी प्राकृतिक आपदाएं मनुष्य को घेरती हैं। इसके साथ ही चक्रवात भूस्खलन बाढ़ या कोई अन्य महामारी त्राहिमाम मचा देती हैं जैसे कि अब वर्तमान समय में कोरोना नामक महामारी ने मचा रखा है। पूरे विश्व में तबाही का मंजर है।
क्योंकि अनेकों देश मांसाहारी हैं और मांस के सेवन की सजा उन्हें मिली है।
👉🏻बेजुबान जानवरों का रोना ही कोरोना बनकर आया है
जब जब धरती पर पाप बढता है तब तब प्राकृतिक आपदाएं आती हैं और फिर कोई भी प्रबन्ध मनुष्यों को बचा नहीं सकता ।
👉🏻धरती पर एकमात्र पूर्ण संत ही इससे राहत दे सकता है।
वर्तमान समय में संत रामपाल जी महाराज ही पूर्ण संत हैं जो सतभक्ति बताते हैं । सतभक्ति करने से ही हमारे शुभ कर्मों में वृद्धि होती है व इन आपदाओं से हमारी रक्षा होती है
अधिक जानकारी के लिए अवश्य पढें पुस्तक ज्ञान गंगा।
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